Saturday, September 14, 2013

शादी के लपट


आज साल लागल रामुआ  के शादी,
चुकल न अबहुँ करजा  के लादी

जोश-जोश में होश गवां के,
राजसी सूट सिलवलें रहल!
रत्न जड़ल शादी के जोरा,
लुगाई के दिलवले रहल!!

चकरी जइसन घुमत स्टेज पे,
चढ़के ऊ जयमाल करवलख !
दूर-दूर तक ढोल बजा के,
पूरा पंचायत के भोज खियवलख !!

बितल जब शादी के मौसम,
बबुआ के गरमी भईल नरम !
तब रंगमहल से बारह अईलख !
देख महाजन के चौखट पे,
कमर के हड्डी गायब पईलख !!

छोड़ लुगाई के अंचरा,
सरपट भागल शहर के ओर !
साल-लागल अबतक रामुआ,
ले ना पवलख घर के टोह !!

कमर सोझ ना भईल ह अबतक,
अब ऊ परवान रहल ना !
कर्जा में दबल रामुआ के,
लुगाई के भी अरमान रहल ना!!
लुगाई के भी अरमान रहल ना……

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