Friday, June 19, 2015

गुहार - II

काश आज भी बच्चा रहतीं,
आज भी मन के सच्चा रहतीं !
काश आज भी बच्चा रहतीं,
आज भी मन के सच्चा रहतीं !!

रहीत ना केहु से बैर-ईर्ष्या,
ना रहीत आपन-आन के भेद !
भाव रहीत लड़कपन के,
रहीत ना पावे-खोवे के खेद !!

जिनगी के पीछे भागत-भागत,
जईसे-जईसे समय बढ़त बा !
समझ-समझ 'दुनिया के रीत',
समझदारी के धूल चढ़त बा !!

इहे धूल के मैलापन,
'शब्द' के हेराफेरी सिखवलख !
नाम-यश के बोध करा के,
अहम के, मन में, भाव जगवलख!!

अहम के ई मोह-भाव में,
बदलल हम-हमार के रूप !
माई-बाप आऊर भाई-बहिन,
आज लागे लगले पटीदार स्वरुप !!

जे से ना निमहल माई-बाप से रिश्ता,
ऊ कइसन आज परिवार बनाई ?
भाई-बहिन में पटीदार देखेवाला,
आपन बचवन के कवन पाठ पढाई ?

ई रीत देख व्याकुल बिशाल,
अपने-आप से करे गुहार !
"काश आज भी बच्चा रहतीं,
आज भी मन के सच्चा रहतीं....."

Thursday, September 19, 2013

जिनगी के सार












ना बूझे हमार$ केहू, बोली-बचनिया....
मरण के पीछे भागे, सबहीं परनिया....

कोई आज जात बाटे, कोई काल्ह  जाई !
दुनिया के रीत ईहे, कहे बिशाल भाई !!

जेहि दिन शरीर के ई, सांस थमी जाई !
लोक-जहान से भी, नाता छूट जाई !!

ना रहियें धन-धान, ना हीं रहियें धनिया....
मरण के पीछे भागे, सबहीं परनिया.....2

जब जईसन करे कोई, ओही  क्षण पावे हो !
मोह के बंधन में बाकिर, समझ न आवे हो !!

मदद करे त$ तन-मन, गद-गद होई जावे हो !
केहू के दरद देहल, संताप ही लावे हो !!

आपन ही मन ना रहे, अपने शरणिया.....
मरण के पीछे भागे, सबहीं परनिया....2

ई माटी के काया से, काहे के लगाव हो !
काहे रहे सबके, सजे के अतना  चाव हो !!

बिशाल कहेला, ई जिनगी पडाव हो !
जिनगी में ना रहे, कबहुँ संताप के भाव हो !!

चैन से सांस चले, काबू में रहे मनिया.....
मरण के पीछे भागे, सबहीं परनिया....2

कोई आज जात बाटे, कोई काल्ह  जाई !
दुनिया के रीत ईहे, कहे बिशाल भाई... 2

Saturday, September 14, 2013

शादी के लपट


आज साल लागल रामुआ  के शादी,
चुकल न अबहुँ करजा  के लादी

जोश-जोश में होश गवां के,
राजसी सूट सिलवलें रहल!
रत्न जड़ल शादी के जोरा,
लुगाई के दिलवले रहल!!

चकरी जइसन घुमत स्टेज पे,
चढ़के ऊ जयमाल करवलख !
दूर-दूर तक ढोल बजा के,
पूरा पंचायत के भोज खियवलख !!

बितल जब शादी के मौसम,
बबुआ के गरमी भईल नरम !
तब रंगमहल से बारह अईलख !
देख महाजन के चौखट पे,
कमर के हड्डी गायब पईलख !!

छोड़ लुगाई के अंचरा,
सरपट भागल शहर के ओर !
साल-लागल अबतक रामुआ,
ले ना पवलख घर के टोह !!

कमर सोझ ना भईल ह अबतक,
अब ऊ परवान रहल ना !
कर्जा में दबल रामुआ के,
लुगाई के भी अरमान रहल ना!!
लुगाई के भी अरमान रहल ना……

Saturday, September 24, 2011

दुखरा बेटी के












गर्व से बाबू चर्चा कइलअ,
जब भइली इंटर पास हो!
बाकिर नौकरी ला आगे पढ़े के इच्छा,
ना आईल तोहके रास हो!!


आगे के जिंदगी ला रचलअ,
अइसन चकरी के चाक हो!
की रिति-रिवाज के चक्कर में,
हमार सब सपना भईल ख़ाक हो!!

आज भले हम कइले बानी,
एमए-बीए पास हो!
पाई-पाई ला रहेला,
मरद-सास-ससुर के आस हो!!

खुश रहें लागे जइसे,
सब कोई आपन ख़ास हो!
भूल-चुक होइले पर देंवें,
लाचारी के आभास हो!!

याद आवे तब बापू, तोहर ,
माई के दुलार हो!
कातना तोहके सतावत रहलीं,
तबहूँ देहलअ प्यार हो!!

देखअ कातना बदल गईल,
हमार दुनिया संसार हो!
 काहे ना पूरा करे देहलअ,
हमार सपना साकार हो!!

देखअ कातना बदल गईल,
हमार दुनिया संसार हो!!

Tuesday, July 20, 2010

बेटी के गुहार













बेटी के जनम से, मन छोट काहे करेलअ तू !
आजीओ (GrandMother) त बेटी रहली,
जिनके कोख से तू अयिलअ !
माईओ  (Mother) त बेटी रहली,
जिनसे जीवन-भर  के साथ तू पयिलअ !
फेरु हमरा आईला से, काहे धीरज नाही धरेलअ तू, 
बेटी के जनम से, मन, छोट काहे करेलअ तू !!

जवना सहुर से माई, ई घर के बसईले बारी,
हमार बचपन-बनईले बारी, तोहर जिंदगी सवंरले बारी,
माई के संघे- संघे, ई सब सहुर हम सिखीला!
जवन पाठ तोहरा के, अफसर बनईलख बाबू (Father),
भैया के संघे-संघे. उ सब पाठ हम पढीला!!

फेरु बाबू! भैया से काहे, कम हमके आंकेलअ !
झूठे तू दहेज़ खातिर, रातीया भर जागेलअ!!
एही दहेज़ से थोडा, आगे-तक पढ़ा दिहीअ!
थोडा आउर हिम्मत करके, अफसर बनायी दिहीअ!!

अफसर बनी के बाबू, नाम तोहर करेब हम!
माई के सहुर से, (ससुरार में) मान तोहर रखेब हम!!
एगो दिन अईसन आयी, जब गुमान हमपे करबअ तू!
ई दुनिया-संसार में, हमार नाम लेकर चलबअ तू!!

Friday, April 16, 2010

फगुआ









(रंगवा-गुलाल हाथे, तोहरे छुवन हम पाइके.....
भइली उमंगअ विभो----------------र........) -

रंग में रंगाइल, 'सजना'!
(रंग में रंगाइल, 'सजना', जब हम बेसुधा रहली...२
कलईया तू देलहअ, काहे मो-------------र......) -२ 

(टिसवा कलईया के, जियरा  में लागल अइसे...
जइसे पापी तरका, गरजे चहुँओ---------र....) -

(अबकी त होली, तोहसे खेलब नाही सजनु....
करेलअ तू हमसे बड़ी-जो-------------र.....) - 

(भइल बिहान, हमके नईहर पहुंचाई दअअ...
सखी लोगन, कइले-होइहे बड़ी शो----र.....) -

(अबकी त होली, तोहसे खेलब नाही सजनु....
कलईया तू देवेलअ,  काहे मो---------र.......) -२
करेलअ तू हमसे बड़ी-जो--------र......

बोले, सियावर रामचन्द्र की जय!
होली है!!!!


   

Thursday, April 15, 2010

सहुर








सरकावत एगो आम के टहनी!
बगइचा घूमके आवत रहनी!!

जुटल रहे, सउँसे मुहल्ला!
सारा गाँव में, भइल हो-हल्ला!!
चारोतरफ पुलिस जमाइल बा!
रामूआ 'नक्सली', बन्हाइल बा!!

"बबुनी  त घर के लक्ष्मी बारी,
इ बबुआ ही हमार जनम के तारी!"
इहे बचन रहे ठकुराइन के!
रामुआ के जनम भइले पर, लोग पहुंचल जब,
महक सूंघ अजवाइन के!!

बबुनी  के सब सहुर सिखइली !
बाकिर, बबुआ के दुलार में आन्हर माई,
रामुआ के सहुर देख न पइली!!

ओही सहुर से आज उ,
'नक्सली' के नाम कमइले  बा!
आज ठाकुरइन के तारे से पहिले,
सब पुरखन के मान डूबइले बा!!

हमर आँख भरल, इ देख लाचारी!
आज, ठकुराइन कइसे कलपत बारी!
ओह!! आज, ठकुराइन कइसे कलपत बारी!!