काश आज भी बच्चा रहतीं,
आज भी मन के सच्चा रहतीं !
काश आज भी बच्चा रहतीं,
आज भी मन के सच्चा रहतीं !!
रहीत ना केहु से बैर-ईर्ष्या,
ना रहीत आपन-आन के भेद !
भाव रहीत लड़कपन के,
रहीत ना पावे-खोवे के खेद !!
जिनगी के पीछे भागत-भागत,
जईसे-जईसे समय बढ़त बा !
समझ-समझ 'दुनिया के रीत',
समझदारी के धूल चढ़त बा !!
इहे धूल के मैलापन,
'शब्द' के हेराफेरी सिखवलख !
नाम-यश के बोध करा के,
अहम के, मन में, भाव जगवलख!!
अहम के ई मोह-भाव में,
बदलल हम-हमार के रूप !
माई-बाप आऊर भाई-बहिन,
आज लागे लगले पटीदार स्वरुप !!
जे से ना निमहल माई-बाप से रिश्ता,
ऊ कइसन आज परिवार बनाई ?
भाई-बहिन में पटीदार देखेवाला,
आपन बचवन के कवन पाठ पढाई ?
ई रीत देख व्याकुल बिशाल,
अपने-आप से करे गुहार !
"काश आज भी बच्चा रहतीं,
आज भी मन के सच्चा रहतीं....."
आज भी मन के सच्चा रहतीं !
काश आज भी बच्चा रहतीं,
आज भी मन के सच्चा रहतीं !!
रहीत ना केहु से बैर-ईर्ष्या,
ना रहीत आपन-आन के भेद !
भाव रहीत लड़कपन के,
रहीत ना पावे-खोवे के खेद !!
जिनगी के पीछे भागत-भागत,
जईसे-जईसे समय बढ़त बा !
समझ-समझ 'दुनिया के रीत',
समझदारी के धूल चढ़त बा !!
इहे धूल के मैलापन,
'शब्द' के हेराफेरी सिखवलख !
नाम-यश के बोध करा के,
अहम के, मन में, भाव जगवलख!!
अहम के ई मोह-भाव में,
बदलल हम-हमार के रूप !
माई-बाप आऊर भाई-बहिन,
आज लागे लगले पटीदार स्वरुप !!
जे से ना निमहल माई-बाप से रिश्ता,
ऊ कइसन आज परिवार बनाई ?
भाई-बहिन में पटीदार देखेवाला,
आपन बचवन के कवन पाठ पढाई ?
ई रीत देख व्याकुल बिशाल,
अपने-आप से करे गुहार !
"काश आज भी बच्चा रहतीं,
आज भी मन के सच्चा रहतीं....."





