बेटी के जनम से, मन छोट काहे करेलअ तू !
आजीओ (GrandMother) त बेटी रहली,
जिनके कोख से तू अयिलअ !
माईओ (Mother) त बेटी रहली,
जिनसे जीवन-भर के साथ तू पयिलअ !
फेरु हमरा आईला से, काहे धीरज नाही धरेलअ तू,
बेटी के जनम से, मन, छोट काहे करेलअ तू !!
जवना सहुर से माई, ई घर के बसईले बारी,
हमार बचपन-बनईले बारी, तोहर जिंदगी सवंरले बारी,
माई के संघे- संघे, ई सब सहुर हम सिखीला!
जवन पाठ तोहरा के, अफसर बनईलख बाबू (Father),
भैया के संघे-संघे. उ सब पाठ हम पढीला!!
फेरु बाबू! भैया से काहे, कम हमके आंकेलअ !
झूठे तू दहेज़ खातिर, रातीया भर जागेलअ!!
एही दहेज़ से थोडा, आगे-तक पढ़ा दिहीअ!
थोडा आउर हिम्मत करके, अफसर बनायी दिहीअ!!
अफसर बनी के बाबू, नाम तोहर करेब हम!
माई के सहुर से, (ससुरार में) मान तोहर रखेब हम!!
एगो दिन अईसन आयी, जब गुमान हमपे करबअ तू!
ई दुनिया-संसार में, हमार नाम लेकर चलबअ तू!!


