Friday, April 16, 2010

फगुआ









(रंगवा-गुलाल हाथे, तोहरे छुवन हम पाइके.....
भइली उमंगअ विभो----------------र........) -

रंग में रंगाइल, 'सजना'!
(रंग में रंगाइल, 'सजना', जब हम बेसुधा रहली...२
कलईया तू देलहअ, काहे मो-------------र......) -२ 

(टिसवा कलईया के, जियरा  में लागल अइसे...
जइसे पापी तरका, गरजे चहुँओ---------र....) -

(अबकी त होली, तोहसे खेलब नाही सजनु....
करेलअ तू हमसे बड़ी-जो-------------र.....) - 

(भइल बिहान, हमके नईहर पहुंचाई दअअ...
सखी लोगन, कइले-होइहे बड़ी शो----र.....) -

(अबकी त होली, तोहसे खेलब नाही सजनु....
कलईया तू देवेलअ,  काहे मो---------र.......) -२
करेलअ तू हमसे बड़ी-जो--------र......

बोले, सियावर रामचन्द्र की जय!
होली है!!!!


   

Thursday, April 15, 2010

सहुर








सरकावत एगो आम के टहनी!
बगइचा घूमके आवत रहनी!!

जुटल रहे, सउँसे मुहल्ला!
सारा गाँव में, भइल हो-हल्ला!!
चारोतरफ पुलिस जमाइल बा!
रामूआ 'नक्सली', बन्हाइल बा!!

"बबुनी  त घर के लक्ष्मी बारी,
इ बबुआ ही हमार जनम के तारी!"
इहे बचन रहे ठकुराइन के!
रामुआ के जनम भइले पर, लोग पहुंचल जब,
महक सूंघ अजवाइन के!!

बबुनी  के सब सहुर सिखइली !
बाकिर, बबुआ के दुलार में आन्हर माई,
रामुआ के सहुर देख न पइली!!

ओही सहुर से आज उ,
'नक्सली' के नाम कमइले  बा!
आज ठाकुरइन के तारे से पहिले,
सब पुरखन के मान डूबइले बा!!

हमर आँख भरल, इ देख लाचारी!
आज, ठकुराइन कइसे कलपत बारी!
ओह!! आज, ठकुराइन कइसे कलपत बारी!!