ना बूझे हमार$ केहू, बोली-बचनिया....
मरण के पीछे भागे, सबहीं परनिया....
कोई आज जात बाटे, कोई काल्ह जाई !
दुनिया के रीत ईहे, कहे बिशाल भाई !!
जेहि दिन शरीर के ई, सांस थमी जाई !
लोक-जहान से भी, नाता छूट जाई !!
ना रहियें धन-धान, ना हीं रहियें धनिया....
मरण के पीछे भागे, सबहीं परनिया.....2
जब जईसन करे कोई, ओही क्षण पावे हो !
मोह के बंधन में बाकिर, समझ न आवे हो !!
मदद करे त$ तन-मन, गद-गद होई जावे हो !
केहू के दरद देहल, संताप ही लावे हो !!
आपन ही मन ना रहे, अपने शरणिया.....
मरण के पीछे भागे, सबहीं परनिया....2
ई माटी के काया से, काहे के लगाव हो !
काहे रहे सबके, सजे के अतना चाव हो !!
बिशाल कहेला, ई जिनगी पडाव हो !
जिनगी में ना रहे, कबहुँ संताप के भाव हो !!
चैन से सांस चले, काबू में रहे मनिया.....
मरण के पीछे भागे, सबहीं परनिया....2
कोई आज जात बाटे, कोई काल्ह जाई !
दुनिया के रीत ईहे, कहे बिशाल भाई... 2

