Thursday, September 19, 2013

जिनगी के सार












ना बूझे हमार$ केहू, बोली-बचनिया....
मरण के पीछे भागे, सबहीं परनिया....

कोई आज जात बाटे, कोई काल्ह  जाई !
दुनिया के रीत ईहे, कहे बिशाल भाई !!

जेहि दिन शरीर के ई, सांस थमी जाई !
लोक-जहान से भी, नाता छूट जाई !!

ना रहियें धन-धान, ना हीं रहियें धनिया....
मरण के पीछे भागे, सबहीं परनिया.....2

जब जईसन करे कोई, ओही  क्षण पावे हो !
मोह के बंधन में बाकिर, समझ न आवे हो !!

मदद करे त$ तन-मन, गद-गद होई जावे हो !
केहू के दरद देहल, संताप ही लावे हो !!

आपन ही मन ना रहे, अपने शरणिया.....
मरण के पीछे भागे, सबहीं परनिया....2

ई माटी के काया से, काहे के लगाव हो !
काहे रहे सबके, सजे के अतना  चाव हो !!

बिशाल कहेला, ई जिनगी पडाव हो !
जिनगी में ना रहे, कबहुँ संताप के भाव हो !!

चैन से सांस चले, काबू में रहे मनिया.....
मरण के पीछे भागे, सबहीं परनिया....2

कोई आज जात बाटे, कोई काल्ह  जाई !
दुनिया के रीत ईहे, कहे बिशाल भाई... 2

Saturday, September 14, 2013

शादी के लपट


आज साल लागल रामुआ  के शादी,
चुकल न अबहुँ करजा  के लादी

जोश-जोश में होश गवां के,
राजसी सूट सिलवलें रहल!
रत्न जड़ल शादी के जोरा,
लुगाई के दिलवले रहल!!

चकरी जइसन घुमत स्टेज पे,
चढ़के ऊ जयमाल करवलख !
दूर-दूर तक ढोल बजा के,
पूरा पंचायत के भोज खियवलख !!

बितल जब शादी के मौसम,
बबुआ के गरमी भईल नरम !
तब रंगमहल से बारह अईलख !
देख महाजन के चौखट पे,
कमर के हड्डी गायब पईलख !!

छोड़ लुगाई के अंचरा,
सरपट भागल शहर के ओर !
साल-लागल अबतक रामुआ,
ले ना पवलख घर के टोह !!

कमर सोझ ना भईल ह अबतक,
अब ऊ परवान रहल ना !
कर्जा में दबल रामुआ के,
लुगाई के भी अरमान रहल ना!!
लुगाई के भी अरमान रहल ना……