Tuesday, July 20, 2010

बेटी के गुहार













बेटी के जनम से, मन छोट काहे करेलअ तू !
आजीओ (GrandMother) त बेटी रहली,
जिनके कोख से तू अयिलअ !
माईओ  (Mother) त बेटी रहली,
जिनसे जीवन-भर  के साथ तू पयिलअ !
फेरु हमरा आईला से, काहे धीरज नाही धरेलअ तू, 
बेटी के जनम से, मन, छोट काहे करेलअ तू !!

जवना सहुर से माई, ई घर के बसईले बारी,
हमार बचपन-बनईले बारी, तोहर जिंदगी सवंरले बारी,
माई के संघे- संघे, ई सब सहुर हम सिखीला!
जवन पाठ तोहरा के, अफसर बनईलख बाबू (Father),
भैया के संघे-संघे. उ सब पाठ हम पढीला!!

फेरु बाबू! भैया से काहे, कम हमके आंकेलअ !
झूठे तू दहेज़ खातिर, रातीया भर जागेलअ!!
एही दहेज़ से थोडा, आगे-तक पढ़ा दिहीअ!
थोडा आउर हिम्मत करके, अफसर बनायी दिहीअ!!

अफसर बनी के बाबू, नाम तोहर करेब हम!
माई के सहुर से, (ससुरार में) मान तोहर रखेब हम!!
एगो दिन अईसन आयी, जब गुमान हमपे करबअ तू!
ई दुनिया-संसार में, हमार नाम लेकर चलबअ तू!!

7 comments:

  1. bahut sunder likhle baara !
    aise hi likhat rahal kara..........lekin kawno bhi europion chhokri ke chakkar me mat padiha....!

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  2. sahi likha hai yaar .. sirf poem hi nahi, tere topic aur tere vichar, dono sahi hai .

    aakhir tu mujhe bhi bhojpuri sikha hi dega :)

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  3. achcha laga....a touchy poem :)

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  4. words that touched the hr8..really nice..keep writing!!

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  5. Its really nice and touching.
    well done.

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  6. Great!...sahi likha hai bhai!....itna achha kaise likhte ho bhai???....bilkul sachhai bayan kiye ho!....i m proud of u my bro!....

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  7. बहुत नीमन लिखले बानी । हर बेटी के करेजा में इहे सवाल रहेला बाकी केहू बुझेला ना

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